अमेरिका द्वारा 10 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ लागू करने के निर्णय के बाद अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने अपनी रणनीतियों पर पुनर्विचार शुरू कर दिया है। Donald Trump के इस फैसले को वैश्विक व्यापार व्यवस्था में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अतिरिक्त शुल्क के कारण कई कंपनियां उत्पादन केंद्रों को स्थानांतरित करने या वैकल्पिक बाजार तलाशने पर विचार कर सकती हैं। विशेष रूप से एशियाई और यूरोपीय देशों की निर्यात-आधारित कंपनियों पर इसका प्रभाव पड़ सकता है। इससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अस्थिरता आ सकती है।
अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि यह कदम घरेलू निर्माण क्षेत्र को मजबूती देगा और रोजगार बढ़ाएगा। लेकिन आलोचकों का कहना है कि वैश्विक व्यापार पर निर्भर उद्योगों को इससे झटका लग सकता है। यदि जवाबी कार्रवाई के तहत अन्य देश भी टैरिफ बढ़ाते हैं, तो निर्यातकों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा कि यह नीति दीर्घकालिक आर्थिक संतुलन स्थापित करती है या वैश्विक व्यापार में नई चुनौतियां खड़ी करती है। फिलहाल, दुनिया भर के बाजार इस फैसले पर नजर बनाए हुए हैं।









