प्रधानमंत्री Narendra Modi का इज़राइल दौरा कई मायनों में ऐतिहासिक माना जा रहा है। वह Knesset को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बनेंगे। यह कदम दोनों देशों के बीच गहराते कूटनीतिक और रणनीतिक संबंधों का प्रतीक है।
भारत और Israel के बीच 1992 में पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित हुए थे। तब से लेकर अब तक रक्षा सहयोग, कृषि अनुसंधान, जल संरक्षण तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में साझेदारी लगातार बढ़ी है। हाल के वर्षों में स्टार्टअप इकोसिस्टम और डिजिटल तकनीक में भी सहयोग मजबूत हुआ है।
इस यात्रा के दौरान संभावित समझौतों में रक्षा तकनीक, उन्नत कृषि प्रणालियां और साइबर सुरक्षा शामिल हो सकते हैं। दोनों देश आतंकवाद के खिलाफ सहयोग और क्षेत्रीय शांति को बढ़ावा देने पर भी जोर दे सकते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, संसद को संबोधित करना केवल सम्मान का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती साख को भी दर्शाता है। यह दौरा पश्चिम एशिया में भारत की सक्रिय विदेश नीति का संकेत है।









