मुंबई में जलभराव से निपटने की नई रणनीति, 10,000 करोड़ की योजना से मिलेगा स्थायी समाधान?

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देश की आर्थिक राजधानी मुंबई हर साल मानसून के दौरान भारी जलभराव और अव्यवस्था का सामना करती है, लेकिन अब इस समस्या से स्थायी समाधान की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। Brihanmumbai Municipal Corporation (बीएमसी) ने शहर में बाढ़ नियंत्रण और जलनिकासी सुधार के लिए लगभग 10,000 करोड़ रुपये की विस्तृत योजना तैयार की है, जिसे मंजूरी के लिए National Disaster Management Authority (एनडीएमए) को भेजा गया है।

इस योजना का उद्देश्य केवल तात्कालिक राहत देना नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों में मुंबई को बाढ़ और जलभराव जैसी समस्याओं से स्थायी रूप से सुरक्षित बनाना है। बीएमसी के अनुसार, शहर में करीब 498 ऐसे स्थान हैं जहां हर मानसून में पानी भर जाता है और आम जनजीवन प्रभावित होता है। इनमें से कई स्थानों पर काम हो चुका है, लेकिन अभी भी कई हाई-रिस्क जोन ऐसे हैं जिन्हें प्राथमिकता के आधार पर सुधारने की जरूरत है।

योजना के तहत सबसे पहले शहर के पुराने और कमजोर ड्रेनेज सिस्टम को अपग्रेड किया जाएगा। कई इलाकों में पाइपलाइन और जलनिकासी व्यवस्था दशकों पुरानी है, जो अब तेजी से बदलते मौसम और भारी बारिश का सामना करने में सक्षम नहीं है। इसी को ध्यान में रखते हुए जलनिकासी क्षमता बढ़ाने और आधुनिक तकनीकों का उपयोग करने की योजना बनाई गई है।

महुल और मोगरा जैसे इलाकों में नए पंपिंग स्टेशन बनाने का प्रस्ताव भी इस योजना का अहम हिस्सा है। इन स्टेशनों की मदद से भारी बारिश के दौरान जमा पानी को तेजी से बाहर निकाला जा सकेगा, जिससे सड़कों और रिहायशी इलाकों में जलभराव की समस्या कम होगी।

इस योजना की एक खास बात यह है कि इसमें “स्पंज सिटी” कॉन्सेप्ट को भी शामिल किया गया है। इसके तहत शहर में ऐसे ग्रीन एरिया, पार्क और विशेष संरचनाएं विकसित की जाएंगी, जो बारिश के पानी को जमीन में सोख लेंगी। इसके अलावा, सड़कों और फुटपाथों पर पारगम्य सामग्री का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे पानी जमा होने की बजाय जमीन में चला जाए।

प्राकृतिक संसाधनों को मजबूत करने के लिए मैंग्रोव और वेटलैंड्स की बहाली पर भी जोर दिया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, ये प्राकृतिक ढांचे बाढ़ के खतरे को कम करने में बेहद कारगर साबित होते हैं और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी मदद करते हैं।

तकनीकी दृष्टि से भी यह योजना काफी आधुनिक है। इसमें एक इंटीग्रेटेड अर्ली वॉर्निंग सिस्टम शामिल किया गया है, जिससे भारी बारिश और संभावित जलभराव की स्थिति का पहले से अंदाजा लगाया जा सके। साथ ही, पंपिंग स्टेशनों और अन्य सिस्टम की रियल-टाइम मॉनिटरिंग से आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई संभव होगी।

मुंबई जैसे बड़े शहर में अलग-अलग एजेंसियों के बीच समन्वय भी एक बड़ी चुनौती होती है। इसको देखते हुए बीएमसी ने रेलवे और अन्य प्राधिकरणों के साथ मिलकर काम करने की रणनीति बनाई है, ताकि जलनिकासी में कोई बाधा न आए।

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