“कुछ ही मिनटों में सब खत्म हो गया”: बर्गी बांध क्रूज़ हादसे ने उजाड़े कई घर, सामने आईं खौफनाक सच्चाइयां

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मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित बर्गी बांध में गुरुवार शाम हुआ क्रूज़ हादसा लोगों के दिलों में गहरी दहशत और शोक छोड़ गया है। इस दर्दनाक घटना में नौ लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि चार लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। हादसे से बचकर निकले लोगों के बयान इस त्रासदी की भयावह तस्वीर सामने रखते हैं।

जानकारी के अनुसार, क्रूज़ में करीब 45 से 50 लोग सवार थे। यह दिन की आखिरी सवारी थी, जिसमें परिवार और पर्यटक खुशी-खुशी सफर का आनंद ले रहे थे। शुरुआत में सब कुछ सामान्य था—संगीत बज रहा था, लोग नाच-गा रहे थे। लेकिन शाम करीब 5:30 बजे मौसम ने अचानक करवट ली और तेज हवाओं के साथ लहरें उफान पर आ गईं।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पहले हल्का झटका लगा, लेकिन कुछ ही पलों में क्रूज़ का संतुलन बिगड़ने लगा। पानी तेजी से नाव में घुसने लगा और यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। कुछ यात्रियों को ऊपर से नीचे जाने के लिए कहा गया, लेकिन वहां मौजूद स्टाफ की ओर से किसी तरह का स्पष्ट मार्गदर्शन या मदद नहीं मिली।

हादसे से बचे लोगों ने बताया कि लाइफ जैकेट केबिन में रखी थीं, लेकिन उन्हें समय पर वितरित नहीं किया गया। कई यात्रियों ने खुद ही जैकेट निकालकर पहन ली और दूसरों को भी पहनाने में मदद की। जिन लोगों को जैकेट नहीं मिल सकी, वे पानी में गिरने के बाद खुद को संभाल नहीं पाए।

जैसे ही क्रूज़ पलटा, हर तरफ चीख-पुकार मच गई। लोग अपने परिजनों को बचाने की कोशिश में इधर-उधर भाग रहे थे। कुछ लोग तैरकर बाहर निकलने में सफल हुए, जबकि कई लोग पानी में डूब गए। एक जीवित बचे यात्री ने बताया, “हमने अपनी आंखों के सामने लोगों को डूबते देखा, लेकिन हम कुछ नहीं कर सके।”

बचाव कार्य को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। यात्रियों का आरोप है कि रेस्क्यू टीम देर से पहुंची। कई लोग लंबे समय तक पानी में संघर्ष करते रहे। अगर समय पर मदद मिल जाती, तो शायद मौत का आंकड़ा इतना अधिक नहीं होता।

इस हादसे की सबसे दर्दनाक कहानी एक 13 वर्षीय बच्ची की है, जिसने इस दुर्घटना में अपनी मां, छोटे भाई और दादी को खो दिया। वह अपने परिवार के साथ छुट्टियां मनाने आई थी, लेकिन यह सफर उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा दुःख बन गया। बताया जाता है कि उसकी मां ने छोटे भाई को बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन दोनों की जान नहीं बच सकी।

घटना के बाद प्रशासन ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया। गोताखोरों की टीम अब भी लापता लोगों की तलाश कर रही है। सरकार ने मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने की घोषणा की है और पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर सुरक्षा इंतजाम बेहतर होते और मौसम को लेकर पहले से सतर्कता बरती जाती, तो इस हादसे को टाला जा सकता था। यह घटना एक बार फिर यह साबित करती है कि लापरवाही और तैयारी की कमी कितनी बड़ी त्रासदी का कारण बन सकती है।

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