पंजाब सरकार में मंत्री और उद्योगपति Sanjeev Arora से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच लगातार तेज होती जा रही है। गुरुग्राम की जिला एवं सत्र अदालत द्वारा सात दिन की ईडी हिरासत मंजूर किए जाने के बाद अब एजेंसी कथित फर्जी मोबाइल फोन निर्यात और विदेशी लेनदेन से जुड़े वित्तीय नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है। इस मामले ने पंजाब की राजनीति और कारोबारी जगत में नई चर्चा छेड़ दी है।
ईडी के अनुसार, जांच की शुरुआत संदिग्ध विदेशी धनराशि और कथित फर्जी निर्यात के इनपुट मिलने के बाद हुई थी। एजेंसी ने हैम्पटन स्काई रियल्टी प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी के कई परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया। जांच में सामने आया कि कंपनी ने वित्त वर्ष 2023-24 में लगभग 157 करोड़ रुपये के मोबाइल फोन व्यापार का दावा किया था। इनमें से करीब 102 करोड़ रुपये संयुक्त अरब अमीरात स्थित दो कंपनियों — फोर्टबेल टेलीकॉम और ड्रैगन टेलीकॉम — को भेजे जाने की बात कही गई।
ईडी का आरोप है कि इस पूरे लेनदेन में कई संदिग्ध कंपनियों का इस्तेमाल किया गया। एजेंसी के मुताबिक, जिन सप्लायर कंपनियों के नाम दस्तावेजों में दिखाए गए, उनमें से कई का वास्तविक अस्तित्व नहीं मिला। कुछ कंपनियों के पास इतने बड़े व्यापार को संभालने की आर्थिक क्षमता भी नहीं थी। जांच एजेंसी का कहना है कि इन फर्मों के जरिए केवल कागजी बिल तैयार किए गए और बिना वास्तविक सामान की आपूर्ति के करोड़ों रुपये का लेनदेन दिखाया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि कई संबंधित कंपनियों ने आयकर रिटर्न दाखिल नहीं किए थे और कुछ के जीएसटी पंजीकरण भी कुछ समय बाद निलंबित कर दिए गए। ईडी को संदेह है कि इन कंपनियों का इस्तेमाल कथित रूप से फर्जी व्यापार दिखाकर धन को विदेश भेजने के लिए किया गया।
मामले में संजीव अरोड़ा के बेटे काव्या अरोड़ा का बयान भी जांच एजेंसी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ईडी के अनुसार, काव्या अरोड़ा ने पूछताछ में कहा कि उन्हें मोबाइल फोन निर्यात कारोबार की जानकारी नहीं थी और वे केवल परिवार के रियल एस्टेट कारोबार को देखते थे। इससे एजेंसी को यह संदेह हुआ कि कंपनी का मूल व्यवसाय रियल एस्टेट होने के बावजूद अचानक बड़े स्तर पर मोबाइल फोन निर्यात शुरू करना केवल कागजी लेनदेन का हिस्सा हो सकता है।
अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि ईडी को कथित धन शोधन की पूरी प्रक्रिया, पैसे के स्रोत और संबंधित लोगों की भूमिका का पता लगाने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना जरूरी है। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि हिरासत के दौरान आरोपी के कानूनी अधिकारों का पूरा ध्यान रखा जाए और नियमित मेडिकल जांच कराई जाए।
इस बीच विपक्षी दलों ने मामले को लेकर पंजाब सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। विपक्ष का आरोप है कि राज्य सरकार को मामले में स्पष्ट जवाब देना चाहिए। हालांकि, अभी तक संजीव अरोड़ा या उनकी ओर से मामले पर विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।







