गुवाहाटी में वन्यजीव तस्करी पर बड़ी कार्रवाई, दुर्लभ गेको की तस्करी से जुड़े नेटवर्क की जांच तेज

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

Guwahati में पुलिस और वन्यजीव संरक्षण एजेंसियों की संयुक्त कार्रवाई में दुर्लभ गेको की तस्करी का बड़ा मामला सामने आया है। बांस की पतली नलियों में छिपाकर ले जाए जा रहे 26 जीवित गेको बरामद किए गए हैं। इस मामले में दो आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क की पड़ताल में जुट गई हैं।

पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई गुप्त सूचना के आधार पर बेटकुची इलाके में की गई। देर शाम चलाए गए अभियान के दौरान संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी गई और दो लोगों को हिरासत में लिया गया। तलाशी के दौरान अधिकारियों को कई बांस की नलियां मिलीं, जिन्हें स्थानीय तौर पर “सुंगा” कहा जाता है।

जांच में पता चला कि प्रत्येक नली के भीतर एक जीवित गेको को सावधानीपूर्वक छिपाया गया था। नलियों को कपड़े और जाल से इस तरह लपेटा गया था कि बाहरी तौर पर किसी को संदेह न हो। पुलिस का कहना है कि यह तरीका वन्यजीव तस्करी में इस्तेमाल होने वाली योजनाबद्ध रणनीति को दर्शाता है।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मोहम्मद इकरामुल हुसैन और मोहम्मद जमीरुद्दीन के रूप में हुई है। दोनों Assam के अलग-अलग जिलों के निवासी बताए गए हैं। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि क्या आरोपी किसी बड़े अंतरराज्यीय या अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी गिरोह से जुड़े हुए हैं।

वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि गेको की कुछ प्रजातियां अंतरराष्ट्रीय अवैध बाजार में बेहद महंगी बिकती हैं। इन्हें विदेशी पालतू जीवों के रूप में रखने के अलावा कई जगहों पर अंधविश्वास और कथित पारंपरिक दवाओं के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। इसी कारण तस्कर इन जीवों को चोरी-छिपे दूसरे राज्यों और देशों तक पहुंचाने की कोशिश करते हैं।

विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि तस्करी के दौरान इन जीवों को बेहद संकरे स्थानों में रखा जाता है, जिससे उनकी जान को गंभीर खतरा होता है। लंबे समय तक ऑक्सीजन की कमी और तनाव के कारण कई वन्यजीव रास्ते में ही मर जाते हैं।

बरामद किए गए गेको को फिलहाल वन विभाग की निगरानी में रखा गया है। अधिकारियों का कहना है कि पशु चिकित्सकों की मदद से उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है। आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें सुरक्षित प्राकृतिक वातावरण में छोड़ा जाएगा।

इस घटना ने पूर्वोत्तर भारत में बढ़ती वन्यजीव तस्करी की समस्या को फिर उजागर किया है। जैव विविधता से भरपूर यह क्षेत्र लंबे समय से तस्करों के निशाने पर रहा है। कई दुर्लभ प्रजातियों की अवैध तस्करी के मामले समय-समय पर सामने आते रहे हैं।

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि वन्यजीव अपराध केवल कानून व्यवस्था का मामला नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण से भी जुड़ा मुद्दा है। गेको जैसे जीव प्राकृतिक खाद्य श्रृंखला और पारिस्थितिकी संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनके कम होने से पर्यावरण पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

वन्यजीव संरक्षण कार्यकर्ताओं ने सरकार और सुरक्षा एजेंसियों से सीमा क्षेत्रों और परिवहन मार्गों पर निगरानी बढ़ाने की मांग की है। साथ ही लोगों को जागरूक करने पर भी जोर दिया जा रहा है ताकि अवैध वन्यजीव व्यापार को सामाजिक स्तर पर भी रोका जा सके।

Leave a Comment

और पढ़ें