असम में यूसीसी विधेयक पर बढ़ी सियासी हलचल, सरकार बोली- सामाजिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम

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Assam विधानसभा में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पेश होने के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma की सरकार ने इसे सामाजिक समानता और महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम बताया है, जबकि विपक्षी दल इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी में जुट गए हैं।

विधानसभा में यह विधेयक संसदीय कार्य मंत्री Atul Bora द्वारा पेश किया गया। विधेयक पेश होने के दौरान विपक्षी विधायकों ने जोरदार विरोध दर्ज कराया और इसे संवेदनशील विषय बताते हुए व्यापक चर्चा की मांग की। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया कि यूसीसी का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित करना है।

प्रस्तावित विधेयक में विवाह की न्यूनतम आयु तय करने, बहुविवाह पर रोक, महिलाओं को समान उत्तराधिकार अधिकार देने और लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण जैसे कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं। सरकार का कहना है कि इससे महिलाओं की स्थिति मजबूत होगी और पारिवारिक कानूनों में पारदर्शिता आएगी।

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पहले भी कई बार कह चुके हैं कि अलग-अलग समुदायों के लिए अलग व्यक्तिगत कानून होने से कई बार महिलाओं और कमजोर वर्गों को न्याय पाने में कठिनाई होती है। सरकार का मानना है कि समान नागरिक संहिता से नागरिकों को एक समान अधिकार और कानूनी सुरक्षा मिल सकेगी।

हालांकि विपक्षी दलों और कुछ सामाजिक संगठनों ने इस विधेयक पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि भारत जैसे विविधता वाले देश में धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को ध्यान में रखे बिना ऐसे कानून लागू करना विवाद का कारण बन सकता है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से भी इस्तेमाल कर सकती है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि राज्य के आदिवासी समुदायों को इस कानून के कुछ प्रावधानों से छूट दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने पहले कहा था कि पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में रहने वाले जनजातीय समुदायों की परंपराओं और सांस्कृतिक अधिकारों का सम्मान किया जाएगा।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यूसीसी का मुद्दा लंबे समय से राष्ट्रीय बहस का हिस्सा रहा है। भारतीय संविधान के नीति निदेशक तत्वों में भी समान नागरिक संहिता लागू करने का उल्लेख किया गया है। हालांकि अब तक इसे पूरे देश में लागू नहीं किया जा सका है क्योंकि यह धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से संवेदनशील विषय माना जाता है।

यदि यह विधेयक पारित होता है तो Assam इस दिशा में पहल करने वाले प्रमुख राज्यों में शामिल हो जाएगा। इससे पहले Uttarakhand और Gujarat में भी यूसीसी को लेकर कदम उठाए जा चुके हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में विधानसभा के भीतर इस विधेयक पर तीखी बहस देखने को मिल सकती है। विपक्ष सरकार से कानून के सामाजिक प्रभाव, धार्मिक स्वतंत्रता और संवैधानिक पहलुओं को लेकर सवाल पूछ सकता है।

वहीं सरकार का दावा है कि यह कानून किसी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं बल्कि सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार सुनिश्चित करने की दिशा में लाया जा रहा है। सरकार इसे आधुनिक और न्यायसंगत समाज की ओर बढ़ाया गया कदम बता रही है।

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