पश्चिम बंगाल के चर्चित आरजी कर मेडिकल कॉलेज रेप और हत्या मामले को लेकर एक बार फिर राज्य की राजनीति गर्मा गई है। पीड़िता की मां और बीजेपी विधायक रत्ना देबनाथ ने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद कहा कि उनकी जिंदगी का अब केवल एक ही उद्देश्य है—अपनी बेटी को न्याय दिलाना। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में अभी कई सवालों के जवाब सामने आना बाकी हैं।
आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में अगस्त 2024 में हुई इस घटना ने पूरे देश में आक्रोश पैदा कर दिया था। ड्यूटी पर मौजूद एक युवा ट्रेनी डॉक्टर का शव अस्पताल परिसर में मिला था। शुरुआती जांच में कई विवाद सामने आए और बाद में मामला रेप और हत्या से जुड़ा बताया गया। घटना के बाद डॉक्टरों, छात्रों और सामाजिक संगठनों ने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किए थे।
पीड़िता की मां लगातार आरोप लगाती रही हैं कि मामले की जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण पहलुओं को दबाने की कोशिश की गई। उनका कहना है कि कई ऐसे लोग हैं जिनकी भूमिका की गंभीरता से जांच नहीं हुई। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने कुछ नाम और जानकारी पहले जांच एजेंसियों को दी थी और अब वही जानकारी मुख्यमंत्री को भी सौंपी गई है।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद उन्होंने कहा कि सत्ता बदलने के बाद उन्हें उम्मीद है कि मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि एक मां के तौर पर उनका दर्द कभी खत्म नहीं हो सकता, लेकिन वह अपनी बेटी के लिए न्याय की लड़ाई अंत तक लड़ेंगी।
हाल ही में कलकत्ता हाईकोर्ट ने मामले की जांच को लेकर बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई की विशेष जांच टीम बनाने का आदेश दिया है। यह टीम घटना की रात से लेकर अंतिम संस्कार तक की पूरी घटनाक्रम की जांच करेगी। अदालत का यह आदेश मामले को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।
बीजेपी ने लंबे समय से आरोप लगाया है कि पूर्व सरकार के दौरान मामले को सही तरीके से नहीं संभाला गया। वहीं तृणमूल कांग्रेस लगातार इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बताती रही है। चुनाव के दौरान भी यह मामला राज्य की राजनीति का बड़ा मुद्दा बना रहा।
इस बीच राज्य सरकार ने कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की है। इन अधिकारियों पर आरोप है कि घटना के समय उन्होंने अपने दायित्वों का सही तरीके से पालन नहीं किया। कुछ अधिकारियों को निलंबित भी किया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल एक आपराधिक घटना नहीं है, बल्कि इससे स्वास्थ्य संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे गंभीर मुद्दे भी सामने आए हैं। महिला डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की सुरक्षा को लेकर पूरे देश में चर्चा तेज हुई है।
पीड़िता की मां ने कहा कि विधायक बनने के बाद भी उनकी जिंदगी में कोई खुशी नहीं बची है। उन्होंने कहा कि समाज तभी सुरक्षित माना जाएगा जब दोषियों को सख्त सजा मिले और भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।







