मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार दिल्ली पहुंचे विजय, राष्ट्रीय राजनीति में बढ़ी हलचल

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विजय का मुख्यमंत्री बनने के बाद पहला दिल्ली दौरा राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। तमिलनाडु की सत्ता संभालने के कुछ ही दिनों बाद राजधानी पहुंचे विजय की मुलाकात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्रियों और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से प्रस्तावित है। इस दौरे ने दक्षिण भारत की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

सूत्रों के मुताबिक, विजय दो दिवसीय दौरे पर दिल्ली पहुंचे हैं। इस दौरान उनका मुख्य उद्देश्य तमिलनाडु के विकास से जुड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार से सहयोग हासिल करना है। राज्य सरकार बुनियादी ढांचे, रेलवे, बंदरगाह, उद्योग, डिजिटल परियोजनाओं और शहरी विकास के लिए अतिरिक्त वित्तीय सहायता की मांग कर सकती है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह दौरा केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि रणनीतिक रूप से भी काफी महत्वपूर्ण है। तमिलनाडु में कई दशकों बाद गठबंधन सरकार बनी है और विजय राष्ट्रीय राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ते दिखाई दे रहे हैं।

तमिलगा वेत्री कझगम ने हालिया विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया था। पार्टी ने 234 सदस्यीय विधानसभा में 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी का दर्जा हासिल किया। हालांकि बहुमत से कुछ सीटें कम रहने के कारण कांग्रेस, सीपीआई, सीपीएम, वीसीके और आईयूएमएल जैसे दलों के समर्थन से सरकार बनाई गई।

राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि विजय की सरकार बनने के बाद यह पहला मौका है जब वह राष्ट्रीय नेताओं से औपचारिक रूप से मुलाकात कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ होने वाली बैठक पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि इस बैठक में केंद्र-राज्य संबंधों, वित्तीय सहायता, निवेश और रोजगार जैसे विषयों पर चर्चा होगी।

इसके अलावा कांग्रेस नेताओं से मुलाकात भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि कांग्रेस तमिलनाडु सरकार की सहयोगी पार्टी है। विश्लेषकों का मानना है कि इन बैठकों में भविष्य की राजनीतिक रणनीति और विपक्षी एकता पर भी चर्चा हो सकती है।

विजय की राजनीतिक यात्रा काफी तेजी से आगे बढ़ी है। लंबे समय तक तमिल सिनेमा के सुपरस्टार रहे विजय ने राजनीति में कदम रखने के बाद युवाओं और पहली बार वोट देने वाले मतदाताओं के बीच तेजी से लोकप्रियता हासिल की। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने रोजगार, शिक्षा, भ्रष्टाचार विरोध और सामाजिक कल्याण जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया था।

उनकी पार्टी की सफलता को तमिलनाडु की पारंपरिक राजनीति में बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। लंबे समय से राज्य की राजनीति द्रविड़ दलों के इर्द-गिर्द घूमती रही थी, लेकिन विजय के उभार ने राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं।

दिल्ली दौरे को लेकर राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि विजय आने वाले समय में राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि फिलहाल उनकी प्राथमिकता तमिलनाडु के लिए केंद्र से अधिक सहयोग प्राप्त करना और अपनी सरकार को स्थिरता देना बताई जा रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर विजय केंद्र और सहयोगी दलों के साथ संतुलन बनाए रखने में सफल रहते हैं, तो वह दक्षिण भारत के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल हो सकते हैं।

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