AI समिट के आयोजन के बाद देश की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है। कार्यक्रम के दौरान सामने आई अव्यवस्थाओं को लेकर जहां सरकार ने सफाई दी, वहीं विपक्ष ने इसे बड़ा मुद्दा बना दिया है। केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि सरकार किसी भी कमी से इनकार नहीं कर रही और आगे के आयोजनों में बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि AI समिट का उद्देश्य भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व के रूप में स्थापित करना था। सरकार का मानना है कि इस तरह के मंच देश की तकनीकी क्षमता को दुनिया के सामने लाने का अवसर देते हैं।
लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार की मंशा और तैयारी दोनों पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि अव्यवस्थाओं के कारण अंतरराष्ट्रीय मेहमानों को असुविधा हुई, जो देश की छवि के लिए सही संकेत नहीं है।
खड़गे ने आरोप लगाया कि सरकार प्रचार में ज्यादा और तैयारी में कम ध्यान देती है। विपक्ष का कहना है कि डिजिटल इंडिया जैसे अभियानों की सफलता तभी मानी जाएगी, जब जमीनी स्तर पर व्यवस्थाएं मजबूत हों।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, AI समिट से जुड़ा यह विवाद आने वाले समय में तकनीकी नीतियों और सरकारी जवाबदेही पर नई चर्चा को जन्म दे सकता है।
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