इस वर्ष होली के अवसर पर लोगों में पर्यावरण और स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता साफ नजर आई। बाजारों में केमिकल युक्त रंगों की बजाय हर्बल और प्राकृतिक रंगों की मांग अधिक रही। दुकानदारों के अनुसार ग्राहकों ने ऐसे उत्पादों को प्राथमिकता दी जो त्वचा और पर्यावरण के लिए सुरक्षित हों।
शहर के कई सामाजिक संगठनों ने “ग्रीन होली” मनाने का अभियान चलाया। लोगों से अपील की गई कि पानी की बर्बादी न करें और सूखी होली खेलें। कई कॉलोनियों में सामूहिक कार्यक्रम हुए, जहां फूलों की होली खेली गई और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।
विशेषज्ञों का कहना है कि रासायनिक रंगों से त्वचा और आंखों को नुकसान पहुंच सकता है, इसलिए प्राकृतिक विकल्प बेहतर हैं। यही कारण है कि इस बार हल्दी, चंदन और फूलों से बने रंगों की बिक्री बढ़ी।
नगर निगम ने भी साफ-सफाई के विशेष इंतजाम किए। त्योहार के बाद सड़कों और सार्वजनिक स्थलों की सफाई के लिए अतिरिक्त कर्मचारी तैनात किए गए।
इस पहल ने यह संदेश दिया कि पारंपरिक त्योहारों को भी आधुनिक जागरूकता के साथ मनाया जा सकता है।









