विशेष रिपोर्ट: पंजाब में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज़, आम आदमी पार्टी का दांव और विपक्षी दलों का पलटवार
चंडीगढ़: पंजाब में विधानसभा चुनावों की उल्टी गिनती शुरू होते ही राजनीतिक हलचल तेज़ हो गई है। 117 सीटों वाली राज्य विधानसभा के लिए सत्ताधारी और विपक्षी दलों ने अपनी बिसात बिछाना शुरू कर दिया है। जहाँ सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) ने चुनाव से महीनों पहले उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर विरोधियों को चौंकाया है, वहीं दल-बदल, रैलियों और जनसंपर्क अभियानों से राज्य की सियासत का पारा चढ़ गया है।
* प्रमुख चेहरे: मुख्यमंत्री भगवंत मान एक बार फिर अपनी पारंपरिक सीट धूरी से चुनावी मैदान में उतरेंगे। इसके अलावा विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां को कोटकपूरा से उम्मीदवार बनाया गया है।
* रणनीति: मुख्यमंत्री भगवंत मान के अनुसार, पार्टी राज्य में बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढाँचे के विकास कार्यों के मुद्दे पर वोट माँगेगी।
2. चुनाव से पहले AAP को झटका: 3 विधायकों ने छोड़ा ‘झाड़ू’, थामी BJP
उम्मीदवारों की घोषणा के तुरंत बाद सत्ताधारी AAP को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है।
* भाजपा में शामिल हुए बागी विधायक: पूर्व IPS अधिकारी व विधायक कुंवर विजय प्रताप सिंह (अमृतसर नॉर्थ), पूर्व मंत्री चेतन सिंह जोड़ामाजरा (समाना) और हरमीत सिंह पठानमाजरा (सनौर) ने AAP से इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया है।
* विपक्ष के हमले: भाजपा में शामिल हुए नेताओं और विपक्षी दलों ने नशा, कानून-व्यवस्था, कर्ज़ और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर मान सरकार को घेरना शुरू कर दिया है।
3. कांग्रेस की ‘इंसाफ रैली’ से शंखनाद
मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने भी ज़मीनी स्तर पर अपनी बढ़त बनाने के लिए अभियान तेज़ कर दिया है:
* राहुल गांधी की इंसाफ रैली: संगरूर और मालवा क्षेत्र की करीब 40 सीटों को साधने के उद्देश्य से कांग्रेस की ‘इंसाफ रैली’ की तैयारियाँ ज़ोरों पर हैं।
* एकजुटता का संदेश: कांग्रेस ने स्थानीय कैडर बैठकों के ज़रिए कार्यकर्ताओं को लामबंद करना और चुनावी प्रबंधन समितियों का गठन शुरू कर दिया है।
पंजाब का चुनावी समीकरण ?
| विवरण | आँकड़े / स्थिति |
कुल विधानसभा सीटें | 117 |
| बहुमत का आँकड़ा | 59 सीटें |
| कुल पंजीकृत मतदाता | ~2.01 करोड़ |
| मुख्य दल | AAP, कांग्रेस, BJP, शिरोमणि अकाली दल (SAD)
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आम आदमी पार्टी जहाँ अपने विकास कार्यों और शुरुआती टिकट घोषणा के सहारे दोबारा सत्ता की राह तलाश रही है, वहीं विधायकों की बगावत और भाजपा-कांग्रेस के आक्रामक अभियानों ने चुनाव को बहुकोणीय और दि
लचस्प बना दिया है।




