देश में राष्ट्रीय मूल्यों और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। नए निर्देशों के तहत अब सरकारी कार्यक्रमों और शैक्षणिक संस्थानों में राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ से पहले राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ का गायन या वादन किया जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य नागरिकों, खासकर छात्रों को स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास और देशभक्ति की भावना से जोड़ना है। वंदे मातरम् को आज़ादी की लड़ाई के दौरान प्रेरणास्रोत माना जाता है और इसका विशेष ऐतिहासिक महत्व रहा है।
नए नियम के अनुसार, स्कूलों में इसे प्रार्थना सभा, विशेष अवसरों और राष्ट्रीय पर्वों के दौरान शामिल किया जा सकता है। वहीं सरकारी विभागों और कार्यालयों में औपचारिक कार्यक्रमों की शुरुआत वंदे मातरम् से की जाएगी, जिसके बाद राष्ट्रगान का पालन किया जाएगा।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस व्यवस्था से राष्ट्रगान की गरिमा और उससे जुड़े नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। दोनों ही गीतों का सम्मान और मर्यादा पूरी तरह बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
इस फैसले को लेकर शैक्षणिक और सामाजिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है। कई लोगों का मानना है कि इससे युवाओं में राष्ट्रीय चेतना और सांस्कृतिक समझ को बढ़ावा मिलेगा, जबकि कुछ इसे परंपराओं से जुड़ाव मजबूत करने की पहल के रूप में देख रहे हैं।
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