हंटावायरस संक्रमण को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। यह वायरस मुख्य रूप से चूहों और अन्य कृन्तकों के जरिए फैलता है और कई बार लोग बिना सीधे संपर्क के भी इसकी चपेट में आ सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, संक्रमित चूहों की बीट, पेशाब या घोंसलों से निकलने वाले सूक्ष्म कण हवा में फैलकर इंसानों तक पहुंच सकते हैं, जिससे गंभीर संक्रमण का खतरा पैदा हो जाता है।
डॉक्टरों का कहना है कि लंबे समय तक बंद पड़े कमरों, स्टोर रूम, गोदामों, खेतों के शेड और पुराने मकानों में यह जोखिम अधिक होता है। जब इन जगहों की सफाई की जाती है, तो सूखे हुए मल-मूत्र या धूल के कण हवा में मिल जाते हैं। यदि इन कणों में वायरस मौजूद हो, तो सांस के जरिए यह शरीर में प्रवेश कर सकता है। इसी प्रक्रिया को “एरोसोलाइजेशन” कहा जाता है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि कई लोग सफाई के दौरान सीधे झाड़ू या वैक्यूम क्लीनर का इस्तेमाल करते हैं, जिससे संक्रमित धूल तेजी से हवा में फैल सकती है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विभाग और डॉक्टर सुरक्षित सफाई प्रक्रिया अपनाने पर जोर देते हैं। उनका कहना है कि किसी भी बंद कमरे को साफ करने से पहले दरवाजे और खिड़कियां खोलकर कम से कम 30 मिनट तक हवा आने देना चाहिए। इसके बाद कीटाणुनाशक स्प्रे या ब्लीच मिश्रित पानी का छिड़काव कर सफाई करनी चाहिए।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, हंटावायरस संक्रमण के शुरुआती लक्षण सामान्य फ्लू जैसे हो सकते हैं। मरीज को तेज बुखार, शरीर दर्द, थकान, सिरदर्द और कमजोरी महसूस हो सकती है। कुछ मामलों में उल्टी, पेट दर्द और सांस लेने में परेशानी भी शुरू हो सकती है। यदि संक्रमण फेफड़ों तक पहुंच जाए, तो स्थिति गंभीर हो सकती है और मरीज को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ सकता है।
डॉक्टरों का कहना है कि जिन लोगों का काम गोदामों, खेतों, निर्माण स्थलों या पुरानी इमारतों में होता है, उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। सफाई करते समय मास्क, दस्ताने और बंद कपड़े पहनना जरूरी है। इसके अलावा खाने-पीने की चीजों को खुले में न छोड़ना और घरों में चूहों की आवाजाही रोकना भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि कई बार लोग चूहों की मौजूदगी को सामान्य मानकर अनदेखा कर देते हैं, लेकिन यही लापरवाही गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है। घरों और कार्यस्थलों में नियमित सफाई, कचरे का सही निपटान और दीवारों या दरारों को बंद करना संक्रमण रोकने में मदद कर सकता है।
हालांकि हंटावायरस संक्रमण के मामले अपेक्षाकृत कम होते हैं, फिर भी इसे गंभीर बीमारी माना जाता है क्योंकि कुछ मामलों में यह जानलेवा साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर पहचान और सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है।







