मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 को रद्द किए जाने के बाद देशभर में छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता और नाराज़गी का माहौल बना हुआ है। राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) ने कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोपों के बाद यह बड़ा फैसला लिया। अब परीक्षा दोबारा आयोजित की जाएगी, लेकिन नई तारीखों की घोषणा अभी नहीं की गई है।
इस फैसले के बाद कई राज्यों में छात्र संगठनों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। दिल्ली में शिक्षा मंत्रालय के बाहर छात्रों ने नारेबाजी करते हुए परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि महीनों की मेहनत और मानसिक तनाव के बाद परीक्षा रद्द होना उनके लिए बड़ा झटका है।
जानकारी के अनुसार, परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक होने की आशंका को लेकर जांच एजेंसियों को कुछ अहम सूचनाएं मिली थीं। इसके बाद मामले की समीक्षा की गई और प्रारंभिक जांच में ऐसे संकेत मिले जिनसे परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठे। इसी आधार पर परीक्षा को रद्द करने का निर्णय लिया गया।
एनटीए ने अपने बयान में कहा कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना बेहद जरूरी है और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को स्वीकार नहीं किया जा सकता। एजेंसी ने कहा कि परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता और छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है। साथ ही पूरे मामले की जांच केंद्रीय एजेंसियों को सौंप दी गई है।
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और तकनीकी गड़बड़ियों के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। इससे छात्रों का भरोसा कमजोर हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा प्रणाली में डिजिटल सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है।
अभिभावकों ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए सरकार से सख्त कदम उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि लाखों छात्र दिन-रात मेहनत करके परीक्षा की तैयारी करते हैं, ऐसे में पेपर लीक जैसी घटनाएं उनके भविष्य पर सीधा असर डालती हैं। कई अभिभावकों ने दोषियों के खिलाफ कड़ी सजा की मांग भी की है।
मेडिकल प्रवेश परीक्षा देश की सबसे महत्वपूर्ण परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। हर साल लाखों छात्र डॉक्टर बनने का सपना लेकर इसमें शामिल होते हैं। परीक्षा रद्द होने से अब छात्रों की तैयारी, प्रवेश प्रक्रिया और शैक्षणिक सत्र पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। कई छात्र दोबारा परीक्षा की तैयारी को लेकर मानसिक दबाव महसूस कर रहे हैं।
विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा है। विपक्ष का आरोप है कि परीक्षा प्रबंधन में गंभीर लापरवाही हुई है और इससे छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है। वहीं सरकार का कहना है कि छात्रों के हितों की रक्षा के लिए त्वरित कार्रवाई की गई और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।







