दक्षिण अटलांटिक क्षेत्र में यात्रा कर रहे एक अभियान जहाज पर हंटावायरस संक्रमण के मामले सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। कई यात्रियों में संक्रमण की पुष्टि होने और तीन लोगों की मौत के बाद अमेरिका समेत कई देशों ने निगरानी व्यवस्था मजबूत कर दी है। प्रभावित यात्रियों को विशेष चिकित्सा इकाइयों और क्वारंटीन केंद्रों में रखा गया है।
स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, संक्रमित यात्रियों की पहचान होते ही जहाज पर सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू कर दिए गए थे। यात्रियों को अपने केबिन में सीमित रहने, मास्क पहनने और सामाजिक दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई। इसके बावजूद कुछ यात्रियों की तबीयत बिगड़ती गई और बाद में उनमें हंटावायरस संक्रमण की पुष्टि हुई।
विशेषज्ञों का कहना है कि हंटावायरस मुख्य रूप से संक्रमित चूहों और उनके मल-मूत्र के संपर्क से फैलता है। जब संक्रमित मल या मूत्र सूखकर हवा में छोटे कणों के रूप में फैलता है और कोई व्यक्ति उन्हें सांस के जरिए अंदर लेता है, तब संक्रमण हो सकता है। यही वजह है कि बंद स्थानों, गोदामों और कम वेंटिलेशन वाले क्षेत्रों में संक्रमण का खतरा अधिक माना जाता है।
स्वास्थ्य एजेंसियों का कहना है कि यह वायरस सामान्य परिस्थितियों में व्यक्ति से व्यक्ति में आसानी से नहीं फैलता। हालांकि, कुछ दुर्लभ मामलों में वायरस के विशेष प्रकार मानव संपर्क के जरिए भी फैल सकते हैं। इसी आशंका को देखते हुए प्रभावित यात्रियों को निगरानी में रखा गया है।
जहाज पर यात्रा कर रहे कई यात्रियों को अमेरिका के विशेष संक्रामक रोग केंद्रों में स्थानांतरित किया गया है। कुछ लोगों को क्वारंटीन यूनिट में रखा गया है, जबकि संक्रमित मरीजों का इलाज बायोकंटेनमेंट इकाइयों में चल रहा है। इन इकाइयों को खासतौर पर गंभीर संक्रामक बीमारियों से निपटने के लिए तैयार किया गया है।
मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार, हंटावायरस संक्रमण के शुरुआती लक्षण फ्लू जैसे होते हैं। मरीज को बुखार, शरीर दर्द, सिरदर्द, कमजोरी और सांस लेने में परेशानी हो सकती है। गंभीर मामलों में यह संक्रमण फेफड़ों और किडनी को प्रभावित कर सकता है। यदि समय पर इलाज न मिले, तो स्थिति जानलेवा भी हो सकती है।
यात्रियों के अनुसार, जहाज पर संक्रमण की जानकारी सामने आने के बाद माहौल पूरी तरह बदल गया था। यात्रियों को सीमित गतिविधियों की अनुमति थी और कई लोग पूरे समय अपने केबिन में ही रहे। स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा लगातार निगरानी और मेडिकल जांच की जा रही थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना अंतरराष्ट्रीय यात्रा और स्वास्थ्य सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी है। महामारी के बाद दुनिया भर में स्वास्थ्य निगरानी को मजबूत किया गया था, लेकिन नए संक्रमणों के खतरे अब भी बने हुए हैं। खासकर दूरस्थ क्षेत्रों और वन्यजीवों से जुड़े इलाकों की यात्राओं में अतिरिक्त सावधानी की आवश्यकता बताई जा रही है।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने लोगों को सलाह दी है कि वे चूहों से संक्रमित क्षेत्रों की सफाई करते समय मास्क और दस्तानों का उपयोग करें। सफाई से पहले बंद स्थानों को अच्छी तरह हवादार करना भी जरूरी बताया गया है।







