Bihar के सासाराम रेलवे स्टेशन पर पैसेंजर ट्रेन के एक कोच में आग लगने की घटना ने रेलवे सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। पटना जाने वाली ट्रेन के डिब्बे में सुबह अचानक आग लगने से स्टेशन पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि समय रहते यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया और कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ, लेकिन घटना ने रेल यात्रियों की सुरक्षा पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार ट्रेन प्लेटफॉर्म नंबर छह पर खड़ी थी और कुछ ही देर में रवाना होने वाली थी। इसी दौरान एक कोच से धुआं निकलता दिखाई दिया। देखते ही देखते आग तेजी से फैलने लगी और पूरा डिब्बा उसकी चपेट में आ गया। प्लेटफॉर्म पर मौजूद यात्रियों में दहशत फैल गई और लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे।
रेलवे कर्मचारियों ने तुरंत स्थिति को संभालने की कोशिश की और यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। सूचना मिलने के बाद फायर ब्रिगेड और रेलवे पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। हालांकि आग इतनी तेज थी कि ट्रेन का एक कोच पूरी तरह जलकर खाक हो गया।
प्रारंभिक जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि इलेक्ट्रिकल सिस्टम में तकनीकी खराबी के कारण आग लगी हो सकती है। हालांकि रेलवे ने पूरे मामले की विस्तृत जांच के आदेश दे दिए हैं ताकि आग लगने के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके।
इस घटना ने हाल के दिनों में ट्रेनों में आग लगने की लगातार बढ़ती घटनाओं की ओर भी ध्यान खींचा है। हाल ही में Madhya Pradesh के रतलाम में Rajdhani Express के एसी कोच में भी आग लग गई थी। उस हादसे में भी यात्रियों को सुरक्षित निकाल लिया गया था, लेकिन रेलवे संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचा था।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय रेलवे में प्रतिदिन लाखों लोग यात्रा करते हैं, इसलिए सुरक्षा व्यवस्था को लगातार आधुनिक बनाने की जरूरत है। पुराने कोच, खराब वायरिंग और समय पर तकनीकी जांच न होना कई बार ऐसे हादसों की वजह बन जाते हैं। रेलवे में इलेक्ट्रिकल सिस्टम की नियमित जांच और फायर सेफ्टी उपकरणों की सही स्थिति बेहद जरूरी मानी जा रही है।
रेलवे प्रशासन ने हाल की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए देशभर में फायर सेफ्टी सिस्टम का व्यापक ऑडिट शुरू किया है। इस अभियान के तहत ट्रेनों में लगे अग्निशमन उपकरण, फायर अलार्म, वायरिंग और आपातकालीन निकासी व्यवस्था की जांच की जा रही है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा मानकों को और सख्त बनाया जाएगा।
रेलवे विशेषज्ञों का मानना है कि नई तकनीक का इस्तेमाल भविष्य में ऐसे हादसों को कम कर सकता है। आधुनिक सेंसर आधारित फायर डिटेक्शन सिस्टम और ऑटोमैटिक अलर्ट सिस्टम से शुरुआती चरण में ही आग की पहचान कर कार्रवाई संभव हो सकती है।
घटना के बाद यात्रियों में डर और चिंता का माहौल है। कई यात्रियों ने रेलवे से सुरक्षा मानकों को और मजबूत करने की मांग की है। वहीं प्रशासन का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए हर जरूरी कदम उठाए जाएंगे।







