रसिकांच्या भारी प्रतिसाद के साथ पु. ल. कला महोत्सव २०२६ का शानदार शुभारंभ; ‘ती दोघं’ अभिवाचन ने जीते दर्शकों के मन!

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रसिकांच्या भारी प्रतिसाद के साथ पु. ल. कला महोत्सव 2026 का शानदार शुभारंभ; ‘ती दोघं’ अभिवाचन ने जीते दर्शकों के मन!
महाराष्ट्र के सांस्कृतिक वैभव और कला जगत की विभिन्न कला विधाओं के उत्सव ‘पु. ल. कला महोत्सव 2026’ का शुभारंभ गुरुवार (5 नवंबर) को प्रभादेवी स्थित पु. ल. देशपांडे महाराष्ट्र कला अकादमी में अत्यंत उत्साहपूर्ण परिवेश में संपन्न हुआ। महोत्सव के पहले ही दिन कला प्रेमियों ने बड़ी संख्या में उपस्थित रहकर इस सांस्कृतिक आयोजन को भरपूर प्रतिसाद दिया। पूरे परिसर में कला और संस्कृति का उत्साह स्पष्ट अनुभव किया जा रहा था।
* पु. ल. देशपांडे महाराष्ट्र कला अकादमी की ओर से आयोजित इस महोत्सव का उद्घाटन सांस्कृतिक कार्य मंत्री ॲड. आशीष शेलार के करकमलों द्वारा किया गया। इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्य विभाग और मराठी भाषा विभाग के सचिव किरण कुलकर्णी, पु. ल. देशपांडे महाराष्ट्र कला अकादमी की संचालिका मीनल जोगलेकर, पु. ल. अकादमी की सलाहकार समिति के अध्यक्ष डॉ. दीपक करंजीकर, और नेशनल गैलरी ऑफ़ मॉडर्न आर्ट (NGMA) की निदेशक निधि चौधरी विशेष रूप से उपस्थित थे। इस दौरान मंत्री आशीष शेलार ने उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों और दर्शकों को दीपावली तथा मराठी रंगभूमि दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने मराठी रंगभूमि की समृद्ध परंपरा, उनकी प्रयोगशीलता और भारतीय रंगभूमि में इसके महत्व को प्रतिबिंबित किया। साथ ही, पु. ल. देशपांडे द्वारा महाराष्ट्र के साहित्य, संगीत और नाट्य क्षेत्र में दिए गए योगदान के संरक्षण और संवर्द्धन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि संशोधित समय में कला प्रतिभाओं को एक उचित मंच प्रदान करने के लिए पु. ल. देशपांडे महाराष्ट्र कला अकादमी महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। इस अवसर पर उन्होंने अकादमी में स्क्रीन एक्ट, संगीत-नाटक-प्रदर्शन और अप्रिसिएशन व क्युरेटिंग नामक तीन नए पाठ्यक्रमों की घोषणा की और पुलोत्सव 2026 के आयोजन की सराहना करते हुए सभी को दीपावली की बधाई दी।
* संचालिका मीनल जोगलेकर – आज माननीय श्री. आशीष शेलार जी ने अपने व्यस्त समय में से समय निकालकर इस कार्यक्रम में शिरकत की और हमारा उत्साहवर्धन किया, जिसके लिए हम उनके विशेष रूप से आभारी हैं। हमारी सलाहकार समिति के अध्यक्ष डॉ. दीपक करंजीकर, सचिव किरण कुलकर्णी जी और उपस्थित सभी दर्शकों का भी मैं दिल से धन्यवाद करती हूँ… आप सभी ने इस महोत्सव को जो अभूतपूर्व प्रतिसाद दिया है, उसके लिए आभार।
* सचिव किरण कुलकर्णी – महाराष्ट्र की मराठी रंगभूमि देश की सबसे समृद्ध रंगभूमि में से एक है, जिसकी परंपरा और लोकप्रियता बहुत बड़ी है। मराठी कला, नाटक और संस्कृति की विरासत को संजोए रखना हर मराठी मानुष की जिम्मेदारी है। पु. ल. देशपांडे महाराष्ट्र कला अकादमी के माध्यम से कलाकारों को प्रोत्साहन, प्रशिक्षण और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने का कार्य किया जा रहा है। हमारा प्रयास इन गतिविधियों को महाराष्ट्र के साथ-साथ देश-विदेश तक पहुँचाने का है। आइए, केवल उत्सव मनाने तक सीमित न रहें बल्कि अपनी सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण और संवर्द्धन करें, यही अपील करते हुए मैं सभी को दीपावली की शुभकामनाएं देता हूँ।
‘ती दोघं’ अभिवाचन रहा पहले दिन का मुख्य आकर्षण
महोत्सव के पहले दिन का विशेष आकर्षण प्रसिद्ध साहित्यकार रत्नाकर मतकरी द्वारा लिखित अभिवाचन (पाठ) ‘ती दोघं’ रहा। विजय केंकरे के निर्देशन में प्रस्तुत इस कार्यक्रम ने उपस्थित दर्शकों का दिल जीत लिया। साहित्यिक कृति के मर्म, भावनाओं और नाटकीयता को अभिवाचन के प्रभावी माध्यम से दर्शकों के चित्रण प्रस्तुत किया गया। कलाकारों की दमदार आवाज में उनकी अभिव्यक्ति, संवाद अदायगी और प्रस्तुति को दर्शकों की ओर से भरपूर दाद मिली। इस अभिवाचन में विद्याधर जोशी, सुप्रिया मतकरी विनोद, हृदया बोरकर, आदित्य कदम, योगेश उतरकर, दीप्ति दांडेकर और विजय केंकरे ने भाग लिया। सभी कलाकारों के बेहतरीन प्रदर्शन से ‘ती दोघं’ इस साहित्यिक कृति का अनुभव और अधिक जीवंत हो उठा। दो घंटे तक चले इस कार्यक्रम में रसिक दर्शक पूरी तरह रम गए। अभिवाचन के हर पहलू को मिले प्रतिसाद ने कलाकारों का उत्साह दोगुना कर दिया।
आगामी कार्यक्रम:
* शुक्रवार, 6 नवंबर को शाम 6. 30 से 7. 30 बजे के बीच दिव्य कलाकारों द्वारा ‘नमो भारत! वंदे मातरम्’ नाट्य प्रयोग प्रस्तुत किया जाएगा। कांचन सोनटक्के की निर्मिति संकल्पना वाले इस नाटक का निर्देशन भारत मोरे ने किया है, जिसमें रोटरी संस्कारधाम अंध केंद्र के<extra_id_1> दिव्य कलाकार भाग लेंगे।
* उसी दिन रात 8 से 10 बजे के बीच ‘हसता-हसवता’ कविता, शब्द और नाटक की हास्य महफिल सजेगी। इस कार्यक्रम में वैभव मांगले, भार्गवी चिरमुले, अधोक्षज कऱ्हाडे, श्रीरंग भवे और दीपाली देसाई भाग लेंगे, जिसकी पटकथा (संहिता) मुकेश माचकर ने लिखी है।
महाराष्ट्र के कला जगत के नामवंत कलाकारों को मंच उपलब्ध कराने के साथ-साथ नई विशिष्टताओं से परिचय कराने का उद्देश्य इस महोत्सव के माध्यम से सफलतापूर्वक पूरा हो रहा है। पहले ही दिन दर्शकों से मिले भारी प्रतिसाद को देखते हुए आगामी कार्यक्रमों को लेकर भी दर्शकों में जबरदस्त उत्सुकता बनी हुई है। कुल मिलाकर, ‘पु. ल. कला महोत्सव 2026’ की शुरुआत बेहद यादगार रही है और ‘ती दोघं’ के अभिवाचन ने महोत्सव के पहले दिन में एक विशेष रंग भर दिया है।

पत्रकार गणेश ट्रेलर – टुडे न्यूज़ बाल गौरव 

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