Narendra Modi का मौजूदा यूरोप दौरा केवल एक औपचारिक विदेश यात्रा नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे भारत की बदलती वैश्विक भूमिका और आर्थिक कूटनीति का बड़ा संकेत माना जा रहा है। नीदरलैंड और स्वीडन सहित कई यूरोपीय देशों की इस यात्रा के दौरान व्यापार, तकनीक, रक्षा, हरित ऊर्जा और निवेश जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा भारत और यूरोप के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा दे सकता है।
प्रधानमंत्री मोदी ऐसे समय में यूरोप पहुंचे हैं जब दुनिया की अर्थव्यवस्था और वैश्विक राजनीति तेजी से बदल रही है। कई यूरोपीय देश अब एशियाई देशों, खासकर भारत के साथ अपने संबंध मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं। भारत को एक बड़े बाजार, स्थिर अर्थव्यवस्था और तकनीकी क्षमता वाले देश के रूप में देखा जा रहा है।
Netherlands में प्रधानमंत्री मोदी की बैठकों का मुख्य फोकस निवेश और हाई-टेक सहयोग पर है। भारत और नीदरलैंड के बीच पिछले कुछ वर्षों में व्यापारिक संबंध लगातार मजबूत हुए हैं। दोनों देशों के बीच जल प्रबंधन, कृषि और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में पहले से सहयोग रहा है, लेकिन अब साझेदारी का दायरा आधुनिक तकनीक और रक्षा तक पहुंच चुका है।
इस दौरे की सबसे अहम संभावनाओं में सेमीकंडक्टर क्षेत्र में सहयोग को माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार Tata Electronics और ASML के बीच गुजरात के धोलेरा में प्रस्तावित सेमीकंडक्टर परियोजना को लेकर बड़ा समझौता हो सकता है। यह भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि देश वैश्विक चिप निर्माण उद्योग में अपनी भूमिका मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार कोविड महामारी और वैश्विक आपूर्ति संकट के बाद दुनिया अब चीन पर अत्यधिक निर्भरता कम करने की कोशिश कर रही है। ऐसे में भारत एक वैकल्पिक मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी हब के रूप में उभर रहा है। यूरोपीय कंपनियां भी भारत में निवेश के अवसर तलाश रही हैं।
प्रधानमंत्री मोदी अपने दौरे के अगले चरण में Sweden जाएंगे, जहां भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन आयोजित होगा। भारत और स्वीडन के बीच संबंधों में पिछले कुछ वर्षों में काफी तेजी आई है। दोनों देश हरित ऊर्जा, डिजिटल तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रक्षा और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं।
स्वीडिश रक्षा कंपनी Saab द्वारा हरियाणा में निर्माण इकाई स्थापित करना भारत-स्वीडन सहयोग का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है। यह “मेक इन इंडिया” अभियान को भी मजबूती देता है और भारत को रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा केवल व्यापारिक समझौतों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की वैश्विक रणनीतिक स्थिति को मजबूत करने की कोशिश भी है। यूरोप के साथ बेहतर संबंध भारत को तकनीकी विकास, निवेश और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई ताकत दे सकते हैं।







