देश में बढ़ते ड्रग्स नेटवर्क और अंतरराष्ट्रीय नार्को तस्करी को लेकर केंद्र सरकार और सुरक्षा एजेंसियां अब अधिक आक्रामक रणनीति अपनाने की तैयारी में दिखाई दे रही हैं। हाल के महीनों में विभिन्न राज्यों और समुद्री क्षेत्रों में बड़ी मात्रा में मादक पदार्थों की बरामदगी ने यह साफ कर दिया है कि भारत अब केवल ड्रग्स के ट्रांजिट रूट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अवैध नशे के कारोबार का बड़ा निशाना बनता जा रहा है।
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि ड्रग तस्करी का नेटवर्क पहले से अधिक संगठित और तकनीकी रूप से सक्षम हो चुका है। समुद्री मार्ग, ड्रोन, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप और डिजिटल पेमेंट सिस्टम का इस्तेमाल कर तस्कर नई रणनीतियों के साथ काम कर रहे हैं। इसी कारण अब जांच एजेंसियां केवल सीमा क्षेत्रों पर ही नहीं, बल्कि साइबर स्पेस और वित्तीय लेनदेन पर भी कड़ी निगरानी बढ़ा रही हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार भारत की भौगोलिक स्थिति उसे दो बड़े अंतरराष्ट्रीय ड्रग उत्पादन क्षेत्रों के बीच संवेदनशील बनाती है। पश्चिम दिशा में अफगानिस्तान-पाकिस्तान क्षेत्र से आने वाली हेरोइन और पूर्वी दिशा में दक्षिण-पूर्व एशिया से आने वाले सिंथेटिक ड्रग्स लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बने हुए हैं। इसके अलावा समुद्री तटों के जरिए भी अवैध खेप भारत तक पहुंचने की कोशिशें लगातार सामने आ रही हैं।
हाल ही में कई बंदरगाहों और राज्यों में की गई कार्रवाई में भारी मात्रा में मादक पदार्थ बरामद किए गए। जांच एजेंसियों का कहना है कि कई मामलों में अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क, हवाला कारोबार और संगठित अपराध से जुड़े कनेक्शन सामने आए हैं। अधिकारियों का मानना है कि ड्रग्स से होने वाली कमाई का इस्तेमाल अन्य अवैध गतिविधियों में भी किया जा सकता है।
सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, अब ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं रही, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक स्थिरता से भी जुड़ चुकी है। युवाओं में बढ़ती नशे की लत, अपराध दर में वृद्धि और अवैध पैसों का प्रवाह देश के लिए दीर्घकालिक खतरा बन सकता है।
सरकार की ओर से एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया जा रहा है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, तटरक्षक बल, सीमा सुरक्षा बल, खुफिया एजेंसियां और राज्य पुलिस मिलकर संयुक्त अभियान चला रही हैं। कई राज्यों में ड्रग्स के खिलाफ विशेष टास्क फोर्स भी सक्रिय की गई हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि ड्रग तस्करी पर प्रभावी रोक लगाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बेहद जरूरी है। कई बार तस्कर अलग-अलग देशों के कानूनों और कमजोर निगरानी व्यवस्था का फायदा उठाते हैं। ऐसे में साझा खुफिया जानकारी, संयुक्त अभियान और कड़े वैश्विक कानूनों की जरूरत महसूस की जा रही है।
सामाजिक संगठनों का मानना है कि केवल गिरफ्तारी और जब्ती से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी। युवाओं में जागरूकता, स्कूल-कॉलेज स्तर पर नशा विरोधी अभियान और पुनर्वास केंद्रों की संख्या बढ़ाना भी जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार, नशे के कारोबार को रोकने के साथ-साथ मांग को कम करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
आर्थिक जानकारों का कहना है कि ड्रग्स से जुड़ा अवैध पैसा देश की वित्तीय व्यवस्था और सामाजिक ढांचे को नुकसान पहुंचा सकता है। हवाला और नकली कंपनियों के जरिए होने वाला लेनदेन कई अन्य आपराधिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देता है।







