दिल्ली में विजय की सक्रियता बढ़ी, केंद्र और विपक्ष दोनों से संवाद ने बढ़ाई राजनीतिक चर्चा

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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय का दिल्ली दौरा राष्ट्रीय राजनीति में नई संभावनाओं और चर्चाओं को जन्म दे रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात के बाद कांग्रेस नेतृत्व के साथ होने वाली प्रस्तावित बैठक टलने से राजनीतिक हलकों में कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि सूत्रों का कहना है कि यह बैठक अगले सप्ताह आयोजित हो सकती है।

मुख्यमंत्री बनने के बाद विजय पहली बार आधिकारिक तौर पर दिल्ली पहुंचे हैं। उनका यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। हालिया विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और बाद में कांग्रेस, वामपंथी दलों तथा अन्य सहयोगी पार्टियों के समर्थन से सरकार का गठन हुआ। राज्य में लंबे समय बाद गठबंधन सरकार बनने को राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

दिल्ली दौरे के दौरान विजय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर तमिलनाडु के कई अहम मुद्दों को सामने रखा। उन्होंने कावेरी नदी से जुड़े मेकेदातु परियोजना पर चिंता जाहिर की और कहा कि इससे तमिलनाडु के किसानों के हित प्रभावित हो सकते हैं। विजय ने यह भी कहा कि राज्य के लोगों में इस परियोजना को लेकर चिंता और असंतोष बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री ने मछुआरों की गिरफ्तारी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने बताया कि तमिलनाडु के कई मछुआरे इस समय श्रीलंका की हिरासत में हैं और उनकी नौकाएं भी जब्त कर ली गई हैं। विजय ने केंद्र सरकार से इस मामले में तेजी से हस्तक्षेप करने और मछुआरों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने की मांग की।

इसके अलावा उन्होंने तमिल सांस्कृतिक पहचान से जुड़े मुद्दों को भी प्रधानमंत्री के सामने रखा। हाल के दिनों में तमिल थाई वाझ्थु गीत को लेकर उठे विवाद का जिक्र करते हुए विजय ने कहा कि तमिलनाडु हमेशा राष्ट्रीय एकता और संवैधानिक मूल्यों का सम्मान करता आया है, लेकिन राज्य की सांस्कृतिक परंपराओं का सम्मान भी उतना ही जरूरी है।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ बैठक में विजय ने तमिलनाडु के विकास से जुड़ी कई परियोजनाओं के लिए आर्थिक सहयोग मांगा। उन्होंने रेलवे, राष्ट्रीय राजमार्ग, औद्योगिक कॉरिडोर और बंदरगाहों के विकास के लिए अतिरिक्त फंड की आवश्यकता बताई। साथ ही उन्होंने मदुरै, कोयंबटूर और इरोड जैसे शहरों में मेट्रो रेल परियोजनाओं को जल्द मंजूरी देने की मांग की।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि विजय खुद को केवल क्षेत्रीय नेता तक सीमित नहीं रखना चाहते। उनका दिल्ली दौरा इस बात का संकेत माना जा रहा है कि वह राष्ट्रीय राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभाने की तैयारी कर रहे हैं। केंद्र सरकार और विपक्ष दोनों के साथ संवाद बनाए रखने की उनकी रणनीति को संतुलित राजनीति के रूप में देखा जा रहा है।

कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी और राहुल गांधी के साथ प्रस्तावित बैठक का टलना भी चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि दोनों पक्षों की ओर से इसे सामान्य कार्यक्रम परिवर्तन बताया जा रहा है, लेकिन राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह मुलाकात आगे चलकर विपक्षी राजनीति के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।

तमिलनाडु में विजय की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है और उनकी सरकार बनने के बाद युवाओं में खास उत्साह देखा गया है। अभिनेता से राजनेता बने विजय अब प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत करने की दिशा में भी कदम बढ़ाते दिखाई दे रहे हैं।

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